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Students of little lotus central school rudrapur Road kathinaiyan Deoria

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Family of little lotus central school rudrapur road deoria,shaili paikauli Deoria

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हमारा उद्देश्य,बचो का विकास

                             हमारा उद्देश्य,बचो का विकास     सभी  सम्मानित अभिभावक अपने बच्चों  के अच्छे विकास के लिए  हमेशा  प्रयास  करते  है  पर अधिकत्तर  अभिभावक  संतुष्ट  नहीं हो पाते  है। इसका  कारण  बच्चो  का सही रूप से मार्गदर्शन  का न  हो  पाना  है।  सही  मार्गदर्शन एक   सही मार्गदर्शक ही दे  सकता  है। सही मार्गदर्शक का चुनाव अधिक रूपया  खर्च  करके  नही प्राप्त किया जा सकता है। सही मार्गदर्शक  एक एक  शिक्षक ही हो सकता  है। वैसे शिक्षक चुनाव आजकल मुश्किल है हम पूर्ण विश्वास के साथ कहते है की वैसे शिक्षक   हमारे पास है।  अच्छे शिक्षक का चुनाव करने  की  विवेक ईश्वर की कृपा से मिली  है। निवेदन अपने बच्चों  का नामांकन लिटिल लोटस सेन्ट्रल स्कूल में कराएं। यह स्कूल देवरिया  सदर के रुद्रपुर रोड पर ...
स्वागतम लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल रुद्रपुर रोड लक्ष्मीनारायण मंदिर से 100मीटर पश्चिम दिशा में ,देवरिया सदर में, प्रत्येक वर्ष उच्च गुडवत्ता के साथ प्रवेश लिया जाता है। प्रवेश परीक्षा में पास होने वाले अभ्यर्थियों की प्रवेश शुल्क में रियायत की जाती है।यह विद्यालय बेटर एजुकेशन के लिए मशहूर है।

खिचड़ी ,मकरसंक्रांति की शुभकामनाएं

हमारे तथा हमारे पूरे परिवार के तरफ से आपको तथा आपके पूरे परिवार को खिचड़ी तथा मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं। पी. के.विश्वकर्मा(प्रधानाचार्य) लिटिल लोटस सेन्ट्रल स्कूल रुद्रपुर रोड, नजदीक श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर देवरिया सदर 274001 धन्यवाद।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक एवम धार्मिक कारण

यह जन-आस्था तथा लोकरुचि का पर्व है। इसे समूची सृष्टि में जीवन अनुप्राणित करने वाले भगवान सूर्य की उपासना का पर्व भी कहते हैं। इस अवसर पर उमड़ने वाले सात्विक भव देश की सांस्कृतिक चेतना को पुष्ट करते हैं। तभी तो लोकसंस्कृति पर्व-मकर संक्रान्ति सम्पूर्ण भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति लगभग प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ती है। सूर्य के उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ते जाने की अवधि को दक्षिणायन तथा दक्षिण से उत्तर की ओर के यात्राकाल को उत्तरायण कहते हैं। वृत के 360 अंशों के समान ही पृथ्वी की परिक्रमापथ 360 अंशों में विभाजित है। इसके अण्डाकार परिक्रमापथ को 30-30 अंशों के समूहों में 12 राशियों में विभक्त किया गया है। पृथ्वी की परिक्रमा करते समय सूर्य जिस राशि में दिखाई देता है, वही सूर्य की राशि कही जाती है। संक्रांति बारह राशियों में सूर्य का संक्रमण है-रवेः संक्रमण राषौ संक्रान्तिरिति कथ्यते। मकर संक्रान्ति नवम् धनु राशि से दशम मकर राशि में संक्रमण है चन्द्रमास साढ़े उन्तीस दिन का एवं चन्द्रवर्ष 354 दिन का होता है, परन्तु सौर-दिन 30 दिन का एवं सौर वर्ष 365 दिन 6...