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Mahatma Gandhi  P.k.vishwakarma Struggle for Indian Independence भारतीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष गोखले के अनुरोध पर सीएफ द्वारा उन्हें अवगत कराया। गांधी 1915 में भारत लौट आए। उन्होंने एक प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी, सिद्धांतवादी और संयोजक के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति लाये । गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और भारतीय मुद्दों, राजनीति और भारतीय लोगों को मुख्य रूप से गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा पेश किया गया। गोखले कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता थे जिन्हें उनके संयम और संयम के लिए जाना जाता था, और सिस्टम के अंदर काम करने पर उनका आग्रह था। गांधी ने गोखले के उदारवादी दृष्टिकोण को ब्रिटिश विग्गिश परंपराओं पर आधारित रखा| 1920 में गांधीजी ने कांग्रेस का नेतृत्व किया और 26 जनवरी 1930 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत की आजादी की घोषणा की। अंग्रेजों ने घोषणा को स्वीकार नहीं किया लेकिन 1930 के उत्तरार्ध में कांग्रेस ने प्रांतीय सरकार में भूमिका निभाई, साथ ही बातचीत शुरू हुई। गांधी और कांग्रेस ने राज का समर्थन वापस ले लिया जब वाइसरॉय ने परामर्श से सितंबर 1939 में जर्...

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी।

करमचंद गांधी “था हम महात्मा गांधी या बापू के नाम से जानते है | बापू का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, काठियावाड़, गुजरात में हुआ | जो तब ब्रिटिश साम्राज्य का एक विभन्न अंग था। महात्मा गांधी के पिता, करमचंद गांधी, पोरबंदर में एक मुख्यमंत्री और उनकी मां, पुतलीबाई, एक धार्मिक महिला थी। गांधी हिंदू भगवान विष्णु की पूजा करते हुए और जैन धर्म का पालन करते थे जो अहिंसा, उपवास, ध्यान और शाकाहार का समर्थन करते थे।13 वर्ष की उम्र में महात्मा गांधी का विवाह एक व्यापारी की बेटी कस्तूरबा मकानजी के साथ हुआ । 1885 में महात्मा गांधी के पिता का निधन हो गया आने वाले वर्षों में, किशोरी धूम्रपान, मांस खाने और घरेलू नौकरों से परिवर्तन चोरी चोरी से विद्रोह किया।महात्मा गांधी का सपना डॉक्टर बनने का था परन्तु उनके पिता उन्हें एक सरकारी मंत्री या कानूनी पेशे में प्रवेश करने के लिए प्रेरित करते थे। चार जीवित बेटों के पहले जन्म के कुछ ही समय बाद गांधी जी कानून की पढ़ाई करने के लिए 1888 में इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए । इस युवा भारतीय को पश्चिमी संस्कृति के साथ संघर्ष करना पड़ा, और लंदन में अपने तीन साल के प्रवा...

गाँधी

         गाँधी जयंती बनाम स्वच्छ        p.k.vishwakarma  जयंती कविता (Gandhi Jayanti Kavita) मैं गाँधी हूँ लेकिन सत्ता का भूखा नहीं देश का वफादार हूँ परतंत्रता मुझे मंजूर नहीं चाहो जो कहना हैं कह दो मैंने कहकर नहीं, करके दिखलाया हैं आज जो स्वतंत्र भूमि मिली हैं तुम्हे कईयों ने उसे जान देकर छुड़ाया हैं आसान हैं गलती निकालना तकलीफों के लिए दोष दे जाना मैंने अंग्रेजो को बाहर फैका था तुम कूड़ा तो फेंक कर दिखलाओं हमने अंग्रजों को बाहर फेंका था   तुम खुद के लिए तो करके दिखलाओं हमने तुम्हे स्वतंत्र भारत दिया था तुम स्वच्छ भारत तो बनाओ भले मत कहो इसे गाँधी जयंती इसे स्वच्छ भारत का आवरण तो चढ़ाओ  भारत।

अनुशासन ही राष्ट्र को महान बनाता हैः

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अनुशासन की पहली पाठशाला परिवार होता है और दूसरी विद्यालय। इसके बिना एक सभ्य समाज की कल्पना करना दुष्कर है। एक स्वस्थ समाज के निर्माण और संचालन में उस आबादी का बड़ा हाथ होता है, जो अपने किसी भी रूप में अनुशासनरूपी सूत्र में गुंथे होने से संभव हो पाता है। दरअसल, अनुशासन की प्रक्रिया रैखिक ही नहीं, बल्कि चक्रीय भी होती है। वह पीछे की और लौटती है, पर ठीक उसी रूप में नहीं। ऐसे में अगर अनुशासन को सरल रेखा खींच कर उसका स्वरूप निर्धारित करने का प्रयास किया जाए तो उसमें दुर्घटना की संभावनाएं हैं। जबकि ‘अनुशासन के बिना न तो परिवार चल सकता है और न ही संस्था और राष्ट्र।’ इसकी व्यापकता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि अनुशासन शब्द समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार से लेकर ‘विश्व-समाज’ की अवधारणा तक अपने विभिन्न अर्थों के साथ किसी न किसी रूप में जुड़ा होता है। लेकिन अपने मूल अर्थ में अनुशासन का अभिप्राय एक ही होता है। देखना यह है कि क्या अनुशासन का स्वरूप भी सभी जगह एक-सा होता है, या परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व आदि हर स्तर पर इसका स्वरूप भी अलग-अलग होगा। ‘किसी भी राष्ट्र का परिचय उसके अन...
हिन्दू धर्म  की महान आध्यात्मिक विरासत सफल और सार्थक यात्रा के लिए जहाँ यात्रा के काम आने वाले उपकरण-अटैची, बिस्तर, पानी पीने के बर्तन आदि आवश्यक होते हैं, वही यह जानना भी, कि यात्रा किस उद्देश्य से की जा रही है? रास्ता क्या है? मार्ग में कहाँ-किस तरह की भौगोलिक समस्याएँ आयेंगी तथा किन लोगों को मार्गदर्शन उपयोग रहेगा? इन जानकारियों के अभाव में सुविधा-सम्पन्न यात्रा तो दूर अनेक अवरोध और संकट उठ खड़े हो सकते हैं। मनुष्य का जीवन भी विराट यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उसमें मात्र सुख-सुविधा संवर्धन तक ही सीमित रह जाने वाले मार्ग में भटकते दुःख भोगते और पश्चात्ताप की आग में जलते हुए  भारत को पुनः एक महान राष्ट्र बनना है, विश्व गुरु का स्थान प्राप्त करना है। उसके लिए जिन श्रेष्ठ व्यक्तियों की आवश्यकता बड़ी संख्या में पड़ती है, उनके विकसित करने के लिए यह संस्कार प्रक्रिया अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।। प्रत्येक विचारशील एवं भावनाशील को इससे जुड़ना चाहिए। शांतिकुंज, गायत्री तपोभूमि मथुरा सहित तमाम गायत्री शक्तिपीठों, गायत्री चेतना केन्द्रों, प्रज्ञापीठों, प्रज्ञा केन्द्रों में...
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अब प्रश्न है कि वृक्षारोपण की आवश्यकता आखिर क्यों होती है? इसके उत्तर में हम यह कह सकते है कि वृक्षारोपण की आवश्यकता इसलिए होती है कि वृक्ष सुरक्षित रहे, वृक्ष या वन नहीं रहेंगे तो हमारा जीवन शून्य होने लगेगा. एक समय ऐसा आ जाएगा कि हम जी भी न पायेंगे. वनों के अभाव में प्रकृति का संतुलन बिगड़ जायेगा. प्रकृति का संतुलन जब बिगड़ जाएगा तब सम्पूर्ण वातावरण इतना दूषित और अशुद्ध हो जायेगा कि हम न ठीक से साँस ले सकेंगे और न ठीक से शारीरिक और आत्मिक विकास कुछ न हो सकेगा. इस प्रकार से वृक्षारोपण की आवश्यकता हमें सम्पूर्ण रूप से प्रभावित करती हुई हमारे जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है. वृक्षारोपण की आवश्यकता की पूर्ति होने से हमारे जीवन और प्रकृति का परस्पर संतुलन क्रम बना रहता है. वृक्षारोपण निबंध में वनों की उपयोगिता वनों के होने से हमें इंधन के लिए पर्याप्त रूप से लकड़ियाँ प्राप्त हो जाती है. बांस की लकड़ी और घास से हमें कागज़ प्राप्त हो जाता है जो हमारे कागज़ उद्योग का मुख्याधार है. वनों की पत्तियों, घास, पौधे, झाड़ियों की अधिकता के कारण तीव्र वर्षा से भूमि का कटाव तीव्र गति से न...