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Happy new year 2o18

Happy New Year 2018 Wishes in Hindi Language नए रंग हों नयी उमंगें आँखों में उल्लास नया नए गगन को छू लेने का मन में हो विश्वास नया नए वर्ष में चलो पुराने मौसम का हम बदलें रंग नयी बहारें लेकर आये जीवन में मधुमास नया नए वर्ष हार्दिक बधाई आप जहाँ जायें वहां से करें सभी के आंसू उड़ान सब लोग आपको ही माने अपना प्यार आपकी हर राह हो हमेशा साफ़ और खुदा दे आपको एक नया झकास नया साल! सदा दूर रहो ग़म की परछाइयों से सामना न हो कभी तन्हाईओं से! हर अरमान हर ख्वाब पूरा हो आपका यही दुआ है दिल की गहराइयों से! नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें! ये फूल ये खुशबू ये बहार ! तुमको मिले ये सब उपहार !! आसमा के चाँद और सितारे ! इन सब से तुम करो सृंगार !! तुम खुश रहों आवाद रहों.. खुशियों का हो ऐसी फुहार ! हमारी ऐसी दुआ हैं हजार !! दामन तुम्हारा छोटा पर जाए ! जीवन में मिले तुम्हे इतना प्यार !! आपकी आँखों में सजे है जो भी सपने, और दिल में छुपी है जो भी अभिलाषाएं! यह नया वर्ष उन्हें सच कर जाए; आप के लिए यही है हमारी शुभकामनायें! बीत गया जो साल, भूल जाए बीत गया जो साल, भूल जाए इस नए साल को ग...

Happy new year 2018

नए साल की पावन बेला में एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएँ हौसलों से अपने सपनों की ऊंचाइयों को छू कर दिखाएँ जो आज तक सिमट कर रह गई थी ख्यालों में.., उन सपनों को  नव वर्ष 2018  में सच कर दिखाएँ………!!!!!!

Happy new year 2018

नए साल की पावन बेला में एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएँ हौसलों से अपने सपनों की ऊंचाइयों को छू कर दिखाएँ जो आज तक सिमट कर रह गई थी ख्यालों में.., उन सपनों को  नव वर्ष 2018  में सच कर दिखाएँ………!!!!!!

Happy new year 2018

नए साल की पावन बेला में एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएँ हौसलों से अपने सपनों की ऊंचाइयों को छू कर दिखाएँ जो आज तक सिमट कर रह गई थी ख्यालों में.., उन सपनों को  नव वर्ष 2018  में सच कर दिखाएँ………!!!!!!
कुछ मित्रों ने अभी से नव वर्ष की अग्रिम शुभकामना की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दिया है । इस परिप्रेक्ष्य मे मैं आप  सब के समक्ष राष्ट्रकवि श्रद्धेय रामधारी सिंह " दिनकर " जी की कविता प्रस्तुत है। ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं है अपनी ये तो रीत नहीं है अपना ये व्यवहार नहीं धरा ठिठुरती है सर्दी से आकाश में कोहरा गहरा है बाग़ बाज़ारों की सरहद पर सर्द हवा का पहरा है सूना है प्रकृति का आँगन कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं हर कोई है घर में दुबका हुआ नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं चंद मास अभी इंतज़ार करो निज मन में तनिक विचार करो नये साल नया कुछ हो तो सही क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही उल्लास मंद है जन -मन का आयी है अभी बहार नहीं ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं ये धुंध कुहासा छंटने दो रातों का राज्य सिमटने दो प्रकृति का रूप निखरने दो फागुन का रंग बिखरने दो प्रकृति दुल्हन का रूप धार जब स्नेह – सुधा बरसायेगी शस्य – श्यामला धरती माता घर -घर खुशहाली लायेगी तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि नव वर्ष मनाया जायेगा आर्यावर्त की पुण्य भूमि...
कुछ मित्रों ने अभी से नव वर्ष की अग्रिम शुभकामना की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दिया है । इस परिप्रेक्ष्य मे मैं आप  सब के समक्ष राष्ट्रकवि श्रद्धेय रामधारी सिंह " दिनकर " जी की कविता प्रस्तुत है। ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं है अपनी ये तो रीत नहीं है अपना ये व्यवहार नहीं धरा ठिठुरती है सर्दी से आकाश में कोहरा गहरा है बाग़ बाज़ारों की सरहद पर सर्द हवा का पहरा है सूना है प्रकृति का आँगन कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं हर कोई है घर में दुबका हुआ नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं चंद मास अभी इंतज़ार करो निज मन में तनिक विचार करो नये साल नया कुछ हो तो सही क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही उल्लास मंद है जन -मन का आयी है अभी बहार नहीं ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं ये धुंध कुहासा छंटने दो रातों का राज्य सिमटने दो प्रकृति का रूप निखरने दो फागुन का रंग बिखरने दो प्रकृति दुल्हन का रूप धार जब स्नेह – सुधा बरसायेगी शस्य – श्यामला धरती माता घर -घर खुशहाली लायेगी तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि नव वर्ष मनाया जायेगा आर्यावर्त की पुण्य भूमि...
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बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ

*एक कवि* नदी के किनारे खड़ा था ! तभी वहाँ से *एक लड़की* का *शव* नदी में तैरता हुआ जा रहा था। तो तभी *कवि ने उस शव* से पूछा ---- कौन हो तुम ओ सुकुमारी, *बह रही नदियां के जल में ?* कोई तो होगा तेरा अपना, *मानव निर्मित इस भू-तल में !* किस घर की तुम बेटी हो, *किस क्यारी की कली हो तुम ?* किसने तुमको छला है बोलो, *क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?* किसके नाम की मेंहदी बोलो, *हांथों पर रची है तेरे ?* बोलो किसके नाम की बिंदिया, *मांथे पर लगी है तेरे ?* लगती हो तुम राजकुमारी, *या देव लोक से आई हो ?* उपमा रहित ये रूप तुम्हारा, *ये रूप कहाँ से लायी हो?* .......... *दूसरा दृश्य----* *कवि* की बातें सुनकर *लड़की की आत्मा* बोलती है... कविराज मुझ को क्षमा करो, *गरीब पिता की बेटी हूं !* इसलिये मृत मीन की भांती, *जल धारा पर लेटी हुँ !* रूप रंग और सुन्दरता ही, *मेरी पहचान बताते है !* कंगन, चूड़ी, बिंदी, मेंहदी, *सुहागन मुझे बनाते है !* पिता के सुख को सुख समझा, *पिता के दुख में दुखी थी मैं !* जीवन के इस तन्हा पथ पर, *पति के संग चली थी मैं !* पति को मेने...
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P.k.vishwakarma Deoria, little lotus central school rudrapur road deoria

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P.k.vishwakarma Deoria , little lotus central school rudrapur road deoria.

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सम्पूर्ण राष्ट्र गान

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Little lotus central school Rudrapur Road Deoria ke bachcho ko railway museum me visiting hetu

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Little lotus central school Deoria ne gorakhanath mandir darshan hetu bachcho ke sath

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शिक्षा

शिक्षा में ज्ञान, उचित आचरण और तकनीकी दक्षता, शिक्षण और विद्या प्राप्ति आदि समाविष्ट हैं। इस प्रकार यह कौशलों (skills), व्यापारों या व्यवसायों एवं मानसिक, नैतिक और सौन्दर्यविषयक के उत्कर्ष पर केंद्रित है।[1] शिक्षा, समाज की एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से रूबरू होता है। शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्त्व का विकसित करने वाली प्रक्रिया है। यही प्रक्रिया उसे समाज में एक वयस्क की भूमिका निभाने के लिए समाजीकृत करती है तथा समाज के सदस्य एवं एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है। शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय लगाने से बना...

Little Lotus central school Rudrapur Road Deoria family and p.k.vishwakarma

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 Students and teachers  Class nursery students  Mr.p.k.vishwakarma Mrs. S.D.Vishwakarma

P.k.vishwakarma

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P.k.  Vishwakarma