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दीपावली पर्व पर एक कविता, deppots

  जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल, उड़े मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले, लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी, निशा की गली में तिमिर राह भूले, खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग, ऊषा जा न पाए, निशा आ ना पाए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। विज्ञापन सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में, कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी, मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी, कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी, चलेगा सदा नाश का खेल यूँ ही, भले ही दिवाली यहाँ रोज आए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ जग में, नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा, उतर क्यों न आयें नखत सब नयन के, नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा, कटेंगे तभी यह अँधरे घिरे अब, स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

शिक्षा है अनमोल रतन

 कोरोनावायरस के कारण हमारा विद्यालय लगभग डेढ़ साल से बंद है, देश के विकास में शिक्षक की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है । शिक्षक किसी देश का भविष्य का निर्माण करता है ।विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में हो गया है । हमारे जनपद मेंऑनलाइन क्लास सफल नहीं है । आवश्यक है कि बच्चों का भविष्य संवारने के लिए विद्यालय को कुछ नियमों के तहत विद्यालय खोलने की।अब अभिभावकों को जागरूक होने की आवश्यकता है अन्यथा आने वाला कल उनके बच्चों केभविष्य के  लिये बहुत दुखदाई होगा। हमे इसी महामारी में बच्चों को पढ़ाना व पढने की कला सीखनी होगी । बच्चे हमारे भविष्य है और भविष्य से  खिलवाड़ ठीक नही होता है। यह महामारी है ,बीमारी नही जो एक हप्ते में ठीक हो जाएगी । महामारी कब तक चलेगी इसका कोई निश्चित तारीख नही है ।अतः बच्चों की भविष्य के लिए पढ़ने और पढ़ाने की कला सीखना ही पड़ेगा। अब अभिभावक सरकार से स्कूल खोलने की मांग करें। धन्यवाद।

महंगाई

 महंगाई बढ़ गई और कमाई समाप्त हो गयी कैसे अपने परिवार को संभाले प्राइवेट छोटे जॉब करने वाले मजदूर व प्राइवेट प्रबंधक व शिक्षक।

छठ महापर्व का पैराणिक महत्व

 छठ महापर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। पी के विश्वकर्मा (प्रधानाचार्य) लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल ,रुद्रपुर रोड नियर लक्ष्मी नारायण मंदिर, beldar मोड़ देवरिया। मो 9450578602 छठ पूजा का इतिहास: पौराणिक कथा के अनुसार, एक राजा था जिसका नाम प्रियंवद था। राजा की कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए राजा ने यज्ञ करवाया। यह यज्ञ महर्षि कश्यप ने संपन्न कराया और यज्ञ करने के बाद महर्षि ने प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर प्रसाद के iरुप में ग्रहण करने के लिए दी। यह खीर खाने से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई लेकिन उनका पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। यह देख राजा बेहद व्याकुल और दुखी हो गए। राजा प्रियंवद अपने मरे हुए पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने लगे। इस समय ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। देवसेना ने राजा से कहा कि वो उनकी पूजा करें। ये देवी सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं। यही कारण है कि ये छठी मईया कही जाती हैं। जैसा माता ने कहा था ठीक वैसे ही राजा ने पुत्र इच्छा की कामना से देवी षष्ठी का व्रत किया। यह व्रत करने से राजा...

दीपावली 2020

  दीपावली का पैराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व एक अन्य पौराणिक घटना के अनुसार इसी दिन श्री लक्ष्मी जी का समुन्द्र-मन्थन से आविर्भाव हुआ था। इस पौराणिक प्रसंगानुसार ऋषि दुर्वासा द्वारा देवराज इन्द्र को दिए गए शाप के कारण श्री लक्ष्मी जी को समुद्र में जाकर समाना पड़ा था। लक्ष्मी जी के बिना देवगण बलहीन व श्रीहीन हो गए। इस परिस्थिति का फायदा उठाकर असुर सुरों पर हावी हो गए। देवगणों की याचना पर भगवान विष्णु ने योजनाबद्ध ढ़ंग से सुरों व असुरों के हाथों समुद्र-मन्थन करवाया। समुन्द्र-मन्थन से अमृत सहित चौदह रत्नों में श्री लक्ष्मी जी भी निकलीं, जिसे श्री विष्णु ने ग्रहण किया। श्री लक्ष्मी जी के पुनार्विभाव से देवगणों में बल व श्री का संचार हुआ और उन्होंने पुन: असुरों पर विजय प्राप्त की। लक्ष्मी जी के इसी पुनार्विभाव की खुशी में समस्त लोकों में दीप प्रज्जवलित करके खुशियां मनाईं गई। इसी मान्यतानुसार प्रतिवर्ष दीपावली को श्री लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना की जाती है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार समृद्धि की देवी श्री लक्ष्मी जी की पूजा सर्वप्रथम नारायण ने स्वर्ग में की। इसके बाद श्री लक्ष्मी जी की पूजा दूसरी ब...

समय

 समय ही सबकुछ है । समय कभी कभी हमें धोखा देता है तो कभी कभी अवसर भी प्रदान करता है। धोखे के समय हमें सावधान तथा अवसर के समय सक्रिय होने की आवश्यकता होती है। धन्यवाद। पीके विश्वकर्मा - प्रधानाचार्य लिटिल लोटस सेन्ट्रल स्कूल देवरिया।