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अभिभावक शिक्षक बैठक

  अभिभावक शिक्षक बैठक2023 आज दिनांक 21 अक्टूबर 2023 को लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल रुद्रपुर रोड देवरिया में अभिभावक टीचर बैठक हुई जिसमें विद्यालय के प्रधानाचार्य पीके विश्वकर्मा ने सभी छात्र-छात्राओं के अभिभावक को संबोधित करते हुए उनका आदर सम्मान किया तथा बच्चों के भविष्य के विकास के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि विद्यालय में पढ़ रहे सभी बच्चे पहले हमारे बच्चे हैं उसके बाद आपके बच्चे हैं इसलिए कि आप फीस जमा करते हैं और हम बारहों  महीने प्रति दिन हर पीरियड में आपके बच्चे के साथ रहते हैं तथा उसकी देखभाल करते हैं और उनकी हमेशा उज्जवल भविष्य के बारे में सोचते हैं। प्रधानाचार्य पीके विश्वकर्मा ने बच्चों के विकास के लिए कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को प्रतिदिन नियमित स्कूल भेजें।यदि कोई छात्र-छात्रा किसी कारण अनुपस्थित होता है तो उसकी जानकारी प्रार्थना पत्र के माध्यम से विद्यालय को दी जाए। विद्यालय द्वारा जो भी क्लास वर्क अथवा होमवर्क दिया जाता है उस पर अभिभावक को अपने बच्चों के साथ कम से कम आधे घंटे का समय दिया जाना चाहिए । जिससे की बच्चे अपना कार्य अपने जिम्मेवारी के साथ करें तथा उन्ह...

admission open

Google पर लिटिल लोटस सेंट्रल विद्यालय: https://search.google.com/local/posts 50% discount in admission fee Special care of students Better education Well disciplined school Teacher's behave is very good Thanks

लिंक लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल देवरिया

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मित्रता की मिशाल

चन्दनं शीतलं लोके ,चन्दनादपि चन्द्रमाः | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः | | अर्थात् : संसार में  लोग चन्दन को शीतल मानते हैं। लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है | अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है |

दीपावली पर्व पर एक कविता, deppots

  जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल, उड़े मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले, लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी, निशा की गली में तिमिर राह भूले, खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग, ऊषा जा न पाए, निशा आ ना पाए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। विज्ञापन सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में, कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी, मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी, कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी, चलेगा सदा नाश का खेल यूँ ही, भले ही दिवाली यहाँ रोज आए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ जग में, नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा, उतर क्यों न आयें नखत सब नयन के, नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा, कटेंगे तभी यह अँधरे घिरे अब, स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

शिक्षा है अनमोल रतन

 कोरोनावायरस के कारण हमारा विद्यालय लगभग डेढ़ साल से बंद है, देश के विकास में शिक्षक की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है । शिक्षक किसी देश का भविष्य का निर्माण करता है ।विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में हो गया है । हमारे जनपद मेंऑनलाइन क्लास सफल नहीं है । आवश्यक है कि बच्चों का भविष्य संवारने के लिए विद्यालय को कुछ नियमों के तहत विद्यालय खोलने की।अब अभिभावकों को जागरूक होने की आवश्यकता है अन्यथा आने वाला कल उनके बच्चों केभविष्य के  लिये बहुत दुखदाई होगा। हमे इसी महामारी में बच्चों को पढ़ाना व पढने की कला सीखनी होगी । बच्चे हमारे भविष्य है और भविष्य से  खिलवाड़ ठीक नही होता है। यह महामारी है ,बीमारी नही जो एक हप्ते में ठीक हो जाएगी । महामारी कब तक चलेगी इसका कोई निश्चित तारीख नही है ।अतः बच्चों की भविष्य के लिए पढ़ने और पढ़ाने की कला सीखना ही पड़ेगा। अब अभिभावक सरकार से स्कूल खोलने की मांग करें। धन्यवाद।