संदेश

पी के विश्वकर्मा प्रधानाचार्य लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल देवरिया

  शीर्षक: "उत्कृष्टता को प्रेरित करना: लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल के लिए प्रिंसिपल पी.के. विश्वकर्मा का विजन" "प्रिंसिपल पी.के. विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में, लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल अकादमिक उत्कृष्टता और समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शिक्षा के प्रति जुनून और युवा दिमागों को पोषित करने की प्रतिबद्धता के साथ, प्रिंसिपल विश्वकर्मा ने एक सहायक और समावेशी शिक्षण वातावरण बनाया है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और चरित्र विकास को बढ़ावा देने के प्रति उनके समर्पण ने उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं। स्कूल की उपलब्धियाँ उनके नेतृत्व और संकाय और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत का प्रमाण हैं। प्रिंसिपल विश्वकर्मा का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता है, और वे प्रत्येक छात्र की भलाई और सफलता में गहराई से निवेश करते हैं। शिक्षण के प्रति उनका उत्साह और प्यार संक्रामक है, जो छात्रों को उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है। लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल भाग्यशाली है कि उसे पी.के. विश्वकर्मा जैसे प्रिंसिपल मिले हैं, जो वास्तव में शिक्षा की भावना को मूर...

Little Lotus Central School regarding as a principal p k Vishwakarma

Title: "Inspiring Excellence: Principal P.K. Vishwakarma's Vision for Little Lotus Central School" "Under the guidance of Principal P.K. Vishwakarma, Little Lotus Central School has flourished into a hub of academic excellence and holistic growth. With a passion for education and a commitment to nurturing young minds, Principal Vishwakarma has created a supportive and inclusive learning environment. His dedication to providing quality education and fostering creativity, critical thinking, and character development has led to outstanding results. The school's achievements are a testament to his leadership and the hard work of the faculty and staff. Principal Vishwakarma's door is always open, and he is deeply invested in the well-being and success of each student. His enthusiasm and love for teaching are contagious, inspiring students to strive for excellence. Little Lotus Central School is fortunate to have a principal like P.K. Vishwakarma, who truly embodie...

New Session 2024

  नए सत्र 2024 में आपका स्वागत है ।  मै पी के विश्वकर्मा प्रधानाचार्य, लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल, देवरिया में नए सत्र 2024 के लिए एडमिशन के लिए आपको स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट या स्कूल कार्यालय से संपर्क करें। वहां आपको आवश्यक जानकारी और प्रक्रिया मिलेगी। हमारे स्कूल में बेहतर शिक्षा के साथ बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होता है। एक स्कूल एक स्थान है जहां छात्र अध्ययन करते हैं और विभिन्न विषयों में ज्ञान प्राप्त करते हैं, साथ ही सामाजिक और आधारिक कौशल भी विकसित करते हैं। एडमिशन एक बच्चे के उच्चतम शिक्षा और समृद्धि की दिशा में पहला कदम होता है। लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल, देवरिया: नए सत्र 2024 में शिक्षा का सफर आरंभ कर दिया है। उच्च मानकों और समृद्धि से भरपूर शिक्षा के लिए हमारे स्कूल में एडमिशन खुल गए हैं।#Education #AdmissionsOpen #LittleLotusSchool2024" अपने पाल्य का एडमिशन कराए "जानिए लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल की विशेषज्ञता और शिक्षा के क्षेत्र में हमारे उत्कृष्ट पाठ्यक्रम के बारे में। सुरक्षित और संबाधित शिक्षा के लिए हमारे पूर्व छात्रों की सकारात्मक प्रतिक्रिया...

जीवन की गतिशीलता

  जीवन की गतिशीलता क्या है हमारा जीवन दिन प्रतिदिन गतिशील है हमें अपने जीवन में इस गतिशीलता का लक्ष्य हासिल करना होगा । जब तक जीवन गतिशील है, तब तक हम कुछ कर सकते हैं ।तो आइए समझते हैं जीवन गतिशीलता क्या है ? जीवन गतिशीलता एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक और प्रगतिशील बदलाव करता है। यह समर्पण, सीखना, और स्वयं सुधार पर आधारित होती है। गतिशीलता व्यक्ति को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति, समस्त दृष्टिकोण में सुधार, और स्वयं को सहजता से स्थानांतरित करने की क्षमता प्रदान करती है। यह जीवन में नए अवसरों को आदर्श रूप से लेने की क्षमता भी बढ़ाती है। पीके विश्वकर्मा ( प्रमोद कुमार विश्वकर्मा) देवरिया यू पी से

हमारी बात आपके साथ

  प्रिय छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों , स्वागत है आप सभी का ' मैं पी के विश्वकर्मा  लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल' का प्रधानाचार्य हूं , मेरा कर्तव्य है सुनिश्चित करना कि हम सभी एक सकारात्मक और शिक्षात्मक परिवार के रूप में साथ मिलकर बच्चों को बेहतर शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए समर्थन प्रदान करें। हमारे विद्यालय का उद्देश्य है न केवल शिक्षा प्रदान करना, बल्कि छात्रों को सशक्त और सहायक नागरिक बनाना है। हम निरंतर उन्नति की दिशा में कदम बढ़ाते हैं ताकि हमारे छात्र अपने अध्ययन और सामाजिक जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें। इस संदर्भ में, मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि आप अपने शिक्षा के क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी लें और समझाएं कि शिक्षा ही सफलता की कुंजी है। हमें एक टीम के रूप में मिलकर काम करना चाहिए ताकि हम छात्रों को सबसे अच्छी शिक्षा प्रदान कर सकें। आप सभी का सहयोग और सहभागिता हमारे विद्यालय को नए ऊचाइयों तक पहुँचने में मदद करेगी। हमारा संबंध एक बड़े परिवार की तरह है, और मैं आशा करता हूँ कि हम सभी मिलकर एक उत्कृष्ट शिक्षा संस्थान की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। आपके द्वारा दिए जाने वाला ...

स्वास्थ्य ही धन है( एक लेख)

स्वास्थ्य ही धन है पर एक लेख    स्वास्थ्य, अगर हमारे जीवन का सबसे मूल्यवान समर्थन है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि 'स्वास्थ्य ही धन है।' यह तथ्य हमें यह बताता है कि किसी भी समझदार और सकारात्मक जीवन के लिए शरीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का सही स्तर पर रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ रोग-मुक्ति नहीं है, बल्कि यह एक सम्पूर्ण विकास की प्रक्रिया है जो शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक स्वास्थ्य के समान्वय को समझती है। सही आहार, नियमित व्यायाम, और पर्याप्त नींद के माध्यम से ही हम शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें तंत्रिका और आत्मनिर्भर बनाता है। स्ट्रेस, चिंता, और अवसाद से बचने के लिए मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहिए। इसके अलावा, सामाजिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है। अच्छे संबंध, साथी और परिवार का समर्थन, और सामाजिक समृद्धि से जुड़ा होना भी स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहारा प्रदान करता है। इस प्रकार, स्वास्थ्य हमारे जीवन का सबसे मूल्यवान धन है, जिसे हमें सावधानीपूर्वक देखभाल करना चाहिए। सही ज...

व्यक्ति का व्यक्तित्व क्या कहलाता है |

व्यक्ति व्यक्तित्व कैसा होना चाहिए  व्यक्ति व्यक्तित्व व्यक्ति के स्वभाव, आचरण, और सोच का समूह होता है जो उसे अन्य लोगों के सामने अनूठा बनाता है। एक स्वस्थ और सकारात्मक व्यक्तित्व कई गुणों, धाराओं और गुणधर्मों पर आधारित हो सकता है। यहां कुछ महत्वपूर्ण गुण हैं जो एक सकारात्मक व्यक्तित्व को चित्रित कर सकते हैं:   1. स्वतंत्रता और स्वाधीनता: एक व्यक्ति को अपने विचारों, मूल्यों और निर्णयों के प्रति स्वतंत्र होना चाहिए। वह अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए स्वाधीनता रखना चाहिए।  2. सकारात्मक सोच: सकारात्मक दृष्टिकोण रखना और आपातकाल में भी संजीवनी स्वभाव बनाए रखना व्यक्ति को सहारा प्रदान कर सकता है।   3. संवेदनशीलता और सहानुभूति: व्यक्ति को अन्य लोगों के भावनाओं का समर्थन करने और समझने की क्षमता होनी चाहिए।  4. निष्ठा और संबंध: एक व्यक्ति को अपने उद्देश्यों और मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए। साथ ही, उसे अपने संबंधों को महत्वपूर्ण बनाए रखना चाहिए।   5. सीधापन और ईमानदारी: एक ईमानदार और सीधे व्यक्ति को उच्च मूल्यांकन किया जाता है। वह अपने कार्यों में सच्...

प्रेम क्या है

वैसे तो प्रेम का अर्थ अलग-अलग भावनाओं से अलग-अलग अर्थ हो सकता है हमारे विचार से प्रेम के परिभाषा यह हो सकती है प्रेम, एक गहरा भावनात्मक अनुभव है जो संबंध, स्नेह, और समर्पण की भावना से जुड़ा होता है। यह एक अनूठा अहसास है जो अन्य के प्रति आत्मिक समर्पण को दर्शाता है और जीवन को सुंदर बनाने में मदद करता है।

जीवन: अनमोल रत्न की महकती कहानी

  जीवन: अनमोल रत्न की महकती कहानी मनुष्य का जीवन एक अनमोल रत्न है, जिसे समझना और महत्वपूर्णीयता देना हमारी जिम्मेदारी है। यह अनमोल रत्न हमें नए अवसर प्रदान करता है और हर क्षण को महत्वपूर्ण बनाता है। 1. सीमित समय , अद्वितीय अवसर : जीवन का समय सीमित होता है, लेकिन इसमें हर दिन नए अवसर छुपे होते हैं। हमें इस अनमोल रत्न का सही रूप से समझना और उसका सदुपयोग करना आवश्यक है।   2.सीख , उन्नति और साझागार : जीवन का सफर सीख, उन्नति, और साझागार का है। हमें हर अनुभव से कुछ सीखना चाहिए और अपनी प्रकृति में सुधार करना चाहिए।   3.प्रेम और समर्पण : जीवन को अनमोल बनाने का एक महत्वपूर्ण तत्व है प्रेम और समर्पण। हमें अपने पासविक सम्बन्धों को महत्वपूर्ण बनाए रखना चाहिए और समाज में सहयोग करना चाहिए।   4.धैर्य और सकारात्मकता : जीवन के अद्भुत सफर में, हमें धैर्य बनाए रखना और सकारात्मकता से युक्त रहना चाहिए। कठिनाईयों का सामना करने में हमारी मेहनत और संघर्ष हमें सहारा देते हैं।   5.प्राकृतिक सौंदर्य का मौन साक्षात्कार : जीवन का अनमोल रत्न हमें प...

धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं।

  धर्म और अधर्म धर्म और अधर्म हम संक्षिप्त में समझेंगे धर्म और अधर्म विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। धर्म सामाजिक और आध्यात्मिक आदर्शों का पालन करने को प्रेरित करता है। जबकि अधर्म उन आदर्शों के विरुद्ध होता है। इन अवधारणाओं में धर्म सामाजिक समृद्धि और समरसता का साधन करने का प्रयास करता है, जबकि अधर्म विघ्न डालता है। अब हम यह समझेंगे कि किस प्रकार धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं है धर्म एक ऐसा आदान-प्रदान है जो समाज को एक सजीव और मिलनसर समृद्धि की दिशा में मार्गदर्शन करता है। धर्म ने सदियों से मानवता को संबोधित किया है और सामाजिक आदान-प्रदान को स्थापित करने में मदद की है। यह तोड़ने की बजाय जोड़ने का सिद्धांत अपनाता है। धर्म समाज को एकीकृत बनाए रखने का कारगर और सहारा होता है। यह लोगों को नेतृत्व, सजीव सामरिकता, और समाजसेवा की दिशा में प्रेरित करता है। धर्म का पालन करने से व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता है और समाज के साथ सजीव संबंध बनाए रखता है। धर्म का सिद्धांत है कि सभी मानव समाज में बराबरी, न्याय, और सहानुभूति के साथ जीवन यापन करें। यह व्य...

चिंता छोड़ो सुख से जियो

 चिंता छोड़ो, सुख से जियो आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में, हम सभी अक्सर चिंतित हो जाते हैं। रोज़मर्रा की चुनौतियों, काम की जोरदार दौड़भाग, और जीवन के अनजाने मोड़ों से हमारी चिंता बढ़ जाती है। हालांकि, इसमें सुख से जीने का रहस्य छुपा होता है। सबसे पहले, हमें यह समझना होता है कि चिंता हमें आगे बढ़ने से रोकती है। जब हम वर्तमान के मौजूदा क्षण का आनंद नहीं लेते, तो भविष्य के बारे में चिंता करना हमें सुख से वंचित कर देता है। सुख से जीने का यह एक और राज है कि हमें अपने आत्मविश्वास को बनाए रखना चाहिए। अगर हम खुद पर विश्वास करते हैं तो हम जीवन की हर मुश्किल को पार कर सकते हैं। अच्छे संबंध बनाए रखना भी एक सुखद जीवन का हिस्सा है। परिवार, दोस्त, और समाज के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना हमें सहारा प्रदान करता है और जीवन को सुंदर बनाए रखता है। इस प्रकार, चिंता को छोड़कर सुख से जीने का मार्ग हमेशा हमारे सामने है, बस हमें इसे धुँआएं और आनंद से हर क्षण का आनंद लें। चिंता को दूर करने के लिए योग और ध्यान भी एक अच्छा तरीका हैं। यह हमें मानसिक शांति और सुकून प्रदान करते हैं जिससे हम सुखपूर्ण जीवन जी सकते...

हमारा मित्र होना चाहिए।

 कहने के लिए तो समाज में हमारे बहुत मित्र होते हैं , परंतु क्या कोई ऐसा भी मित्र होता है जो हमारे साया के जैसे हो हमारा मित्र हमारे साए के जैसे होना चाहिए जैसे की हमारा साया जो हमारे साथ-साथ अंदर बाहर जाता रहता है । जितना  मुझे दिखाई देता है , वह उससे अधिक है । एड़ी से छोटी तक उसकी मुझसे अत्यधिक समानता है ।और मैं देखता हूं कि मेरे बिस्तर पर लेटने से पहले ही वह वहां पहुंच जाता है ।तो हमारा मित्र ऐसा ही होना चाहिए जो विपत्ति काल में या सुख के समय हमारे साया के जैसे  हमेशा हमारे साथ रहे  धन्यवाद पी के विश्वकर्मा देवरिया।

जीवन एक संघर्ष है ।जीवन के अनमोल वचन

 डार्विन ने कहा था जीवन एक संघर्ष है जिस प्रकार के बरसात में जंगल में पास पास एक ही प्रकार के या विभिन्न प्रकार के पौधे एक साथ उगते है। लेकिन उसी में कुछ पौधे बरसात के ज्यादा जल के वजह से सूख जाते हैं कुछ पौधे भोजन न मिलने की वजह से सुख चाहते हैं तथा उसी में कुछ पौधों को जानवर खा जाते हैं, जिससे वह सूख जाते हैं ,लेकिन कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो संघर्ष करते-करते बहुत ऊपर निकल जाते हैं ।और वही सफल होते हैं । वही एक मजबूत पौधे और एक विशाल वृक्ष का रूप धारण करते हैं । और जब ऐसी स्थिति आती है तो उसे कहते हैं योग्यतम की उत्तरजीविता अर्थात  जीवित होता है जो योग्य होता है। जीवन एक संघर्ष है और इस जीवन में संघर्ष जितना ही कठिन होती है सफलता उतनी ही शानदार होती है। जीवन में जो कुछ हम निर्णय लेते हैं वह सारे निर्णय हमारे नहीं होते उसमें से कुछ निर्णय प्रकृति के होते हैं तो कुछ निर्णय समय के अधीन होता है अतः सभी निर्णय को अपना मान लेना यह उचित नहीं है। दो प्रकार के पहलू होती हैं एक होता है सुख जो सबको दिखता है । और दूसरा होता है दुख जो किसी को नहीं दिखता है जबकि दुख ही हमें जीना सिखाता है औ...

करवा चौथ

करवा चौथ के बारे में करवा चौथ कार्तिक मास के चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। करवा चौथ के दिन माताएं बहने बिना जल तथा अन्य ग्रहण किया उपवास रखती हैं तथा शाम को चंद्रमा का दर्शन करने के बाद ही अपना उपवास तोड़ती हैं मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पति की आयु लंबी होती है। करवा व्रत रखने से घर परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि आती है। पुराणों में एक कथा आती है कि जब दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा से नाराज हुए तो उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि तुम्हारा क्षय हो जायेगा ।तब चंद्रमा ने भगवान शिव के पास जाकर प्रार्थना किया अपने व्यथा सुनाएं तब भगवान शिव ने कहा कि तुम्हारा क्षय धीरे-धीरे होगा तथा पूर्णिमा को तुम पूर्ण रूप से दिखाई दोगे । इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा की बाकी चतुर्थी को तो नहीं लेकिन यदि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी के दिन जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा उसके घर सुख समृद्धि लौट आएगी तथा जो महिलाएं इसका व्रत करेंगे उनके पति की आयु लंबी होगी। महिलाएं अपने पति को चलनी में क्यों देखती हैं ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा को स्पष्ट नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए तथा कार्तिक मास के चतुर्थी के द...

अभिभावक शिक्षक बैठक

  अभिभावक शिक्षक बैठक2023 आज दिनांक 21 अक्टूबर 2023 को लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल रुद्रपुर रोड देवरिया में अभिभावक टीचर बैठक हुई जिसमें विद्यालय के प्रधानाचार्य पीके विश्वकर्मा ने सभी छात्र-छात्राओं के अभिभावक को संबोधित करते हुए उनका आदर सम्मान किया तथा बच्चों के भविष्य के विकास के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि विद्यालय में पढ़ रहे सभी बच्चे पहले हमारे बच्चे हैं उसके बाद आपके बच्चे हैं इसलिए कि आप फीस जमा करते हैं और हम बारहों  महीने प्रति दिन हर पीरियड में आपके बच्चे के साथ रहते हैं तथा उसकी देखभाल करते हैं और उनकी हमेशा उज्जवल भविष्य के बारे में सोचते हैं। प्रधानाचार्य पीके विश्वकर्मा ने बच्चों के विकास के लिए कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को प्रतिदिन नियमित स्कूल भेजें।यदि कोई छात्र-छात्रा किसी कारण अनुपस्थित होता है तो उसकी जानकारी प्रार्थना पत्र के माध्यम से विद्यालय को दी जाए। विद्यालय द्वारा जो भी क्लास वर्क अथवा होमवर्क दिया जाता है उस पर अभिभावक को अपने बच्चों के साथ कम से कम आधे घंटे का समय दिया जाना चाहिए । जिससे की बच्चे अपना कार्य अपने जिम्मेवारी के साथ करें तथा उन्ह...

admission open

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लिंक लिटिल लोटस सेंट्रल स्कूल देवरिया

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मित्रता की मिशाल

चन्दनं शीतलं लोके ,चन्दनादपि चन्द्रमाः | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः | | अर्थात् : संसार में  लोग चन्दन को शीतल मानते हैं। लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है | अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है |

दीपावली पर्व पर एक कविता, deppots

  जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल, उड़े मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले, लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी, निशा की गली में तिमिर राह भूले, खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग, ऊषा जा न पाए, निशा आ ना पाए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। विज्ञापन सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में, कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी, मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी, कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी, चलेगा सदा नाश का खेल यूँ ही, भले ही दिवाली यहाँ रोज आए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ जग में, नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा, उतर क्यों न आयें नखत सब नयन के, नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा, कटेंगे तभी यह अँधरे घिरे अब, स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।